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Showing posts from 2022

विद्या भारती पूर्व कच्छ- गुजरात विभाग के विधालय में तुलसी पुजन

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25.12.2022 तुलसी  पूजन दिन के शुभ अवसर पर विद्या भारती पूर्व कच्छ विभाग गुजरात के सभी 14 विद्यालय में तुलसी पूजन उत्सव का आयोजन किया गया। विद्यालय में शिशु मंदिर से लेकर बड़े छात्र, आचार्य, नियामक श्री और व्यवस्थापक   सभी ने अग्निहोत्र यज्ञ के साथ तुलसी पूजन किया। बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों के साथ घर में तुलसी पूजन किया। श्री के.पी.सी.ए सरस्वती विद्या मंदिर भचाउ में विभाग बैठक में पूर्व कच्छ विभाग में की गई पर्यावरण प्रवृत्ति और नए प्रकल्प का वृत पर्यावरण प्रमुख उमेश सोंडागर ने दिया। श्री के.पी.सी.ए सरस्वती विद्या मंदिर भचाउ में  पूर्व कच्छ विभाग के अध्यक्ष श्री केशुभाई मोरसाणिया, उपाध्यक्ष श्री धर्मेशभाई पंड्या, विभाग मंत्री श्री कौशिकभाई ठक्कर, पर्यावरण प्रमुख श्री उमेशभाई सोंडागर, नीलेंदु भाई ठाकर, पूर्व विभाग के तमाम विद्यालय के आचार्य, प्रतिनिधि ने तुलसी प्लांटेशन और तुलसी पूजन किया और औषधि प्लांटेशन भी किया। विद्यालय के तुलसी पूजन कार्यक्रम के फोटो और स्थान के नाम : श्री के.पी.सी.ए सरस्वती विद्या मंदिर -भचाउ ...

25 दिसंबर तुलसी पुजन दिन

भारत में जनरली हर घर में तुलसी मा का पौधा जरूर होगा चाहे वह हिंदू हो या ना हो। हमारे देवी देवताओं में तुलसी मां प्रत्यक्ष देवी है, जिसको हम देख सकते हैं, छू सकते हैं। कोई भी सामान्य रोग हो या महामारी हो तुलसी माता ने औषधि से हमारी रक्षा की है और माता करती आ रही है। 25 दिसंबर तुलसी पुजन दिन है। विद्या भारती विद्यालय के हर अभिभावकों, आचार्यों और छात्रा को विनती है उस दिन हम तुलसी पूजन करें। हमारे छात्र भारतीय संस्कृति की और सही दिशा में चले यह देखना हमारा कर्तव्य है। अभिभावकों को विनती है अपने बच्चों को मां तुलसी की महिमा समझाए और हमारे भारतीय संस्कृति में क्या महत्व है, कथा क्या है, वह थोड़ा समय निकाल ले और सुनाएं। हमारे ऋषि-मुनियों ने उत्सव, जयंती इसलिए बनाये है की उस दिन जो उत्सव या जयंती है उसका हम सांस्कृतिक धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व समझे। उमेश सोंडागर  (योग शिक्षक, गिलोय प्रचारक) प्रमुख,  विद्या भारती - पर्यावरण विभाग  पूर्व कच्छ- गुजरात M -9726792900

इको फ्रेंडली रंगोली - फुल, पत्ते लकड़े का वेस्ट और स्टोन पाउडर कलर की रंगोली

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इको फ्रेंडली रंगोली आज मैंने जो रंगोली बनाई है उसके कलर फुल, पत्ते लकड़े का वेस्ट और स्टोन पाउडर से बनाया हुआ है। यह सब कलर मैंने खुद बनाया है। वुडन कलर- वुडन वेस्ट से पीला कलर - गेंदा फूल से केसरी कलर- पलाश के फूल से सफेद कलर- स्टोन पाउडर से गुलाबी कलर -देसी गुलाब की पत्ती से हरा कलर- पत्ते के पाउडर से लाल कलर- हर्बल गुलाल और रेत काला कलर - चारकोल और रेत से राई जब आपको रंगोली की जरूरत नहीं रहे तब आप सब कलर कोई गमले या गार्डन में डाल दीजिए यह अच्छे खाद का काम करेगी। उमेश सोन्डागर  (योग शिक्षक, गिलोय प्रचारक) प्रमुख, पर्यावरण विभाग  विद्या भारती पूर्व कच्छ - गुजरात M-9726792900

स्टूडेंट के लिए सस्ती कीमत और उच्च गुणवत्ता वाले सामान के लिए वीडियो

स्टूडेंट के लिए सस्ती कीमत और उच्च गुणवत्ता वाला कागज चिपकाने वाला लिक्विड कौन सा ले इस पर मैंने एक वीडियो बनाया है। उमेश सोंडागर प्रमुख,  विद्याभारती पर्यावरण विभाग - पूर्व कच्छ गुजरात प्रांत  વિદ્યા ભારતી પૂર્વ કચ્છ વિભાગના વિદ્યાલયના વાલીઓને વિદ્યાર્થીઓ માટે ચીજવસ્તુઓ ચોંટાડવા માટે સસ્તી કિંમતે અને ઉચ્ચ ગુણવત્તાની સામગ્રી માટે મળી શકે તે માટે મેં એક વિડીયો બનાવ્યો છે. ઉમેશ સોંડાગર પ્રમુખ, વિદ્યાભારતી પર્યાવરણ વિભાગ  પૂર્વ કચ્છ  वीडियो देखने के क्लिक करें

शरद पूर्णिमा की खड़ी शक्कर का स्वास्थ्य महत्व

09.10.2022 को शरद पूर्णिमा है। उस दिन खड़ी शक्कर यानी कि ROCK SUGAR को आप पूरी रात चंद्रमा की चांदनी में रखे,और उसको पूरे साल उपयोग करे।  ये खड़ी शक्कर का छोटा टुकड़ा मुंह में रखकर चूसने से आपको पित, एसिडिटी, शरीर के जलन, गर्मी,मानसिक असंतुलन, टेन्शन और मन की शांति के लिए बहुत फायदा करेगा। गर्मी में आप शरबत मे खड़ी शक्कर का उपयोग कर सकते हैं, जिससे शरीर को ठंडक मिलती है।  शरद पूर्णिमा की खीर दिल के और फेफड़े के मरीज़ों, पित, एसीडीटी लिए भी काफी फायदेमंद होती है. इसे खाने से श्वांस संबंधी बीमारी भी दूर होती हैं. शरद पूर्णिमा के दिन चांदनी में बैठने से सुंदरतामे निखार आता है। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी संपूर्ण 16 कलाओं से परिपूर्ण रहता है, चंद्रमा की घटती और बढ़ती अवस्था से ही मानसिक और शारीरिक उतार-चढ़ाव आते हैं। अमावस्या और पूर्णिमा को चन्द्रमा के विशेष प्रभाव से समुद्र में ज्वार-भाटा आता है। जब चन्द्रमा इतने बड़े  समुद्र में उथल-पुथल कर सकता है तो हमारे शरीर के जलीय अंश, सप्तधातुएं और सप्त रंग पर भी चंद्रमा का विशेष सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। Umesh Sondagar (Yog shi...

किस प्रकार की मिट्टी किस प्रकार के धान के लिए अनुकूल होगी

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किस प्रकार की मिट्टी किस प्रकार के धान के लिए अनुकूल होगी। What type of soil would be suitable for what type of crop. 1.जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil) में होने वाली फसलें यह मीठी हल्के पीले कलर की होती है और थोड़ी चिकनी होती है मिट्टी को नदियों के किनारे, बाढ़ के मैदान और डेल्टास में पाएंगे। जलोढ़ मिट्टी पोटाश में समृद्ध होता है लेकिन इसमें फास्फोरस की कमी होती है।  जलोढ़ मिट्टी पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और गुजरात के उत्तरी भागों में पाई जाती है। तंबाकू, कपास, चावल, गेहूं, बाजरा, ज्वार, मटर, लोबिया, काबुली चना, काला चना, हरा चना, सोयाबीन, मूंगफली, सरसों, तिल, जूट, मक्का, तिलहन फसलें, सब्ज़ियों और फलों की खेती इस मिट्टी में होती है। 2.काली मिट्टी (Black Soil) इस मिट्टी में होने वाली मुख्य फसल कपास है लेकिन इसके अलावा गन्ना, गेहूं, ज्वार, सूरजमुखी, अनाज की फसलें, चावल, खट्टे फल, सब्ज़ियां, तंबाखू, मूंगफली, अलसी, बाजरा व तिलहनी फसलें होती हैं। काली मिट्टी चूना, लोहा, मैग्नीशियम और एल्युमिनियम से समृद्ध होता है। काली मिट्टी गुजरात, महा...