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"प्रकृति संस्कार" प्रकल्प (Project)

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विद्या भारती पूर्व कच्छ पर्यावरण विभाग द्वारा वेकेशन में छात्रों ( Student) के लिए "प्रकृति संस्कार" प्रकल्प (Project) इस वेकेशन में छात्र प्रकृति के नजदीक रहे, उसमें से कुछ सीखें और प्रकृति के लिए अपना समय दे इस हेतु से यह प्रकल्प हमने चालू किया है। अभिभावकों (Parents) को विनती है कि वह अपने बच्चे को इस वेकेशन में प्रकृति के लिए कुछ करें ऐसा मार्गदर्शन करें, उसे समझाएं। पौधे लगाना,  चिड़िया के लिए वेस्ट कार्टन बोकस से घोंसला बनाना, चिड़िया को पानी मिले उसके मिट्टी के पात्र रखना    आपके मार्गदर्शन के लिए हमने पोस्ट में नीचे दो लिंक दिया है जिसमें आपको प्लांटेशन, चिड़िया के लिए वेस्ट कार्टन बोकस से घोंसला कैसे बनाएं इसकी लिंक दी है। वेस्ट कार्टन बॉक्स से चिड़ियों का घोंसला कैसे बनाएं उसके लिए वीडियो लिंक: https://youtu.be/NX8tCB1Qqh0 बीज से कैसे प्लांटेशन करें उसकी लिंक: वेस्ट पाइप प्लांटेशन टेक्निक लिंक; https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=pfbid0u6mCEBa7142is2qqUUzxAUkgFTP9dyNovPJU2kxaDyrtEsqiDZDL48eMJWj471r3l&id=1716355407&mibextid=Nif5oz ...

हर घर छोटा चिड़ियाघर प्रकल्प

वैकेशन का समय बच्चों के लिए सीखने और प्रकृति से जुड़ने का सुनहरा अवसर है। वेस्ट कॉटन बॉक्स से चिड़ियाघर बनाना रचनात्मकता के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। इस छोटे प्रयास से बच्चे पुनः उपयोग की आदत सीखते हैं, प्रकृति के करीब आते हैं और राष्ट्र विकास में अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। वेस्ट बॉक्स से चिड़ियाघर कैसे बना सकता है, इसके नीचे लिंक पर क्लिक करें  वीडियो लिंक  

विद्या भारती पर्यावरण विभाग, पूर्व कच्छ - गुजरात प्रांत का नोटबुक बचत जागृति अभियान।

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पेरेंट्स और स्टूडेंट नोटबुक के बारे में क्या ध्यान रखें आप सबको पता ही है कि कितने पेड़ों के बलिदान से नोटबुक के पेज बनते हैं। हर साल नोटबुक की कीमत बढ़ती जा रही है। इस बात को ध्यान में रखते हुए एक जागृति अभियान हम चला रहे हैं, पैरंट्स और स्टूडेंट को जानकारी मिले और नोटबुक का यूज़ सही तरीके से हो यह हमारा हेतु है। साथ में महंगाई के जमाने में पेरेंट्स को पेज री यूज़ करके नोटबुक मे थोड़ी राहत मिले। आपका बालक जब नई नोटबुक मांगे तब पेरेंट्स यह  चेक करें 1. नोटबुक में कितने पेज खाली है 2. बालक ने सही तरीके से नोटबुक में लिखा है कि नहीं? 3. बीच में कोरे पेज छोडे हैं? छोड़े हैं तो क्यों छोड़े हैं वह सवाल करिए। 4. नोटबुक से पेज फाडे है? फटे हुए देखे तो पूछे क्यों फाड़े? 5. पुरी नोटबुक चेक करके देखिए तो उसमें कहीं फालतू ड्रॉइंग किया है? 6. बालक जितने पेज की नोट बुक मागे, उतने ही पेज कि खरीद कर दे। एक बार क्लास टीचर से भी कनंफॅम करें। 7. अपने बालक की महीने में एक बार सब नोटबुक और टेक्सबुक चेक करें। नोटबुक के बचे हुए पेज रीयूज कैसे करें? पेरेंट्स अपने बालक को एक ही साइज की नोटबुक खरीद के दे। ...

🌿 धरा-धन बीज संरक्षण एवं संवर्धन प्रकल्प 🌿

🌿 धरा-धन बीज संरक्षण एवं संवर्धन प्रकल्प 🌿 विद्या भारती औषधि बीज बैंक, पूर्व कच्छ (गुजरात प्रांत) द्वारा संचालित इस प्रकल्प का उद्देश्य भारत के विभिन्न प्रांतों में पाए जाने वाले दुर्लभ, देशज औषधीय पौधों, पुष्पों एवं वृक्षों के बीजों का संरक्षण, संवर्धन एवं व्यापक वितरण करना है। हम इन अमूल्य बीजों का संकलन कर उनका पौधारोपण करते हैं और पुनः समाज में वितरित करते हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग प्रकृति से जुड़ सकें। 🙏 प्रांत संयोजकों से विनम्र निवेदन 🙏 आपके क्षेत्र में उपलब्ध विशेष एवं दुर्लभ बीज इस पवित्र कार्य हेतु हमें भेजने की कृपा करें। आपका यह छोटा सा सहयोग प्रकृति संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान होगा। बीज भेजने हेतु कुरियर शुल्क आपको अग्रिम रूप से प्रदान किया जाएगा। आइए, हम सभी मिलकर इस अभियान का हिस्सा बनें और आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखें। 🌱 “एक बीज – अनेक जीवन” 🌱 📍 बीज भेजने का पता: Umesh Sondagar T.D.X -104, 12 Vadi, Adipur Dist. Kutch, Gujarat - 370205 📞 9726792900

एक छोटा बदलाव, बड़ी बचत: गैस स्टव से 30% तक बचत का आसान तरीका

आज के समय में बढ़ती महंगाई के बीच रसोई खर्च को कम करना हर घर की प्राथमिकता बन गया है। नीचे दिए गए प्रेरणादायक वीडियो में एक ऐसा सरल और प्रभावी उपाय बताया गया है, जिसे अपनाकर आप अपने गैस स्टव की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा सकते हैं। इस छोटे से बदलाव से गैस की लौ सीधे बर्तन पर केंद्रित होती है, जिससे ऊर्जा का सही उपयोग होता है। परिणामस्वरूप, खाना जल्दी बनता है, समय की बचत होती है और गैस की खपत में 20–30% तक कमी आती है। यह उपाय न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देता है। कम गैस का उपयोग मतलब कम कार्बन उत्सर्जन—यानी स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण की दिशा में एक कदम। आज ही इस सरल तकनीक को अपनाएं और अपनी रसोई को स्मार्ट बनाएं। छोटी-छोटी समझदारी से ही बड़े बदलाव आते हैं। – उमेश सोंडागर पूर्व कच्छ पर्यावरण विभाग, गुजरात प्रांत गैस बचत वीडियो देखने के लिए क्लिक करें

विद्या भारती संचालित औषधि बीज बैंक मेंदुर्लभ और लुप्त बीजों का कलेक्शन

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विद्या भारती संचालित बीज बैंक का उद्देश्य दुर्लभ और उत्कृष्ट औषधीय बीजों का संरक्षण एवं प्रसार है। 1.9 किलो का बेल फल (बीली पत्र) प्रकृति की अनमोल देन है। हमारा प्रयास है कि लोग पौधारोपण कर शुद्ध, प्राकृतिक औषधियों से स्वास्थ्य लाभ लें। औषधि बीज बैंक,  पूर्व कच्छ पर्यावरण विभाग,  गुजरात प्रांत 

विश्व गौरैया (ચકલી) दिवस पर विद्या भारती के छात्रों के लिए संदेश

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विश्व गौरैया दिवस पर विद्या भारती के छात्रों के लिए संदेश प्रिय छात्रों, 20 मार्च को हम विश्व गौरैया दिवस मनाते हैं, जो हमें प्रकृति और पक्षियों के संरक्षण का महत्व सिखाता है। गौरैया, जो कभी हर घर, आंगन और पेड़ों पर चहकती थी, अब दुर्लभ होती जा रही है। इसका मुख्य कारण आधुनिक जीवनशैली, पेड़ों की कटाई, मोबाइल टावरों से निकलने वाला रेडिएशन और रासायनिक कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग है। गौरैया केवल एक छोटी चिड़िया नहीं, बल्कि हमारे पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह फसलों को हानिकारक कीटों से बचाती है और पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखती है। यदि हमने अभी कदम नहीं उठाए, तो आने वाली पीढ़ियों को यह सुंदर पक्षी देखने को नहीं मिलेगा। आप सभी छात्र अपनी जिम्मेदारी निभाएं—अपने घर और स्कूल के आसपास छोटे जल पात्र रखें, बागवानी करें, पेड़ लगाएं और पक्षियों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाएं। घोंसले बनाने के लिए घास और लकड़ी के टुकड़े उपलब्ध कराएं। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का कम उपयोग करें। आइए, इस विश्व गौरैया दिवस पर संकल्प लें कि हम प्रकृति और पक्षियों की रक्षा करेंगे, ताकि हमारी धरती सदैव हरियाली और ...

विद्या भारती पर्यावरण विभाग पूर्व कच्छ, गुजरात प्रांत का वेस्ट में से बेस्ट “बर्ड होम प्रोजेक्ट”

नमस्कार,  बच्चों, वैकेशनमें अपना समय मोबाइल और खेलकूद के साथ कुदरत की दी गई चीज को बचाने और बढ़ाने के लिए भी कुछ समय दे। पर्यावरण का बैलेंस रहेगा तभी राष्ट्र और विश्व विकास करेगा।  जिस तरफ पेड़ कट रहे हैं उससे लगता है अगले कुछ सालों में पंछियों को घोसला बनाने के लिए जगह नहीं मिलेगी। इस बात को ध्यानमें रखते हुए एक प्रोजेक्ट का आयोजन किया है। अपने घर में कोई वेस्ट  बोकस से पंछी का घर कैसे बनाएं इसका मार्गदर्शन वीडियो नीचे लिंक में रखा है। और स्टूडेंट एक घर जरूर बनाएं। वीडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें।👇 वीडियो के लिए यहां क्लिक करें उमेश सोन्डागर (योग शिक्षक, गिलोय प्रचारक) प्रमुख, विद्या भारती-पर्यावरण विभाग पूर्व कच्छ- गुजरात प्रांत। India M- +91 9726792900

बीज प्रदर्शनी

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विद्या भारती पूर्व कच्छ पर्यावरण विभाग, गुजरात प्रांत द्वारा 10 जनवरी 2026 को अजरामर श्री सरस्वती विद्या मंदिर, आदिपुर में छात्रों के लिए बीज प्रदर्शनी और पहचान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार के बीजों की पहचान, उनके महत्व और प्रकृति से जुड़ाव के बारे में जागरूक करना था। छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर कई औषधीय, फल-फूल और वृक्षों के बीजों को जाना और समझा। ऐसे कार्यक्रम बच्चों में पर्यावरण के प्रति प्रेम, संरक्षण की भावना और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। यह पहल भविष्य की पीढ़ी को हरित और जागरूक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 🌱🌿

वेस्ट प्लास्टिक केन और जार से पक्षियों का घोंसला बनाएं

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प्लास्टिक कचरा पर्यावरण के लिए बड़ी समस्या है, लेकिन विद्यार्थी इसे रचनात्मक तरीके से उपयोग कर सकते हैं। वेस्ट प्लास्टिक केन और बरणियों से पक्षियों के लिए सुंदर VIP घर बनाना एक प्रेरणादायक पहल है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ पक्षियों को सुरक्षित आश्रय मिलता है और विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी बढ़ती है। मैं हर साल ऐसे 50 घोसले बनाता हूं🌿🐦 उमेश सोंडागर पूर्व कच्छ पर्यावरण विभाग   गुजरात प्रांत

संतरे के छिलकों से बगीचे की सेहत सुधारें और कीटों को दूर भगाएँ

🌱संतरे के छिलकों से बगीचे की सेहत सुधारें और कीटों को दूर भगाएँ संतरे के छिलके केवल कचरा नहीं, बल्कि आपके बगीचे के लिए प्राकृतिक वरदान हैं। इनमें मौजूद पोषक तत्व मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं और उनकी तेज़ खुशबू कई हानिकारक कीटों को दूर रखती है। *खाद के रूप में उपयोग:* सूखे संतरे के छिलकों को बारीक काटकर या पीसकर कम्पोस्ट में मिलाएँ। इससे मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम की मात्रा बढ़ती है, जो पौधों की जड़ों को मजबूत बनाती है। *कीट नियंत्रण:* संतरे के छिलकों की खुशबू एफिड्स और चींटियों जैसे कीटों को पसंद नहीं होती। छिलकों को पौधों के आसपास रखने से कीट स्वाभाविक रूप से दूर रहते हैं। 👉 ध्यान रखें: हमेशा जैविक (ऑर्गेनिक) संतरे के छिलकों का ही उपयोग करें। छिलकों को फेंकने के बजाय अपनाएँ और अपने बगीचे को बनाएं पूरी तरह प्राकृतिक और स्वस्थ। 🌿 उमेश सोन्डागर  पूर्व कच्छ पर्यावरण विभाग  गुजरात प्रांत

होली की राख (Ash) के फायदे

होली की राख (Ash) के फायदे मैं हर साल करीबन 5 किलो जितनी होली की राख होली के नेक्स्ट डे छान के कलेक्ट करके रखता हूं और उसका औषधि प्रयोग करता हूं। स्किन इन्फेक्शन और स्किन ग्लो मैं यह बहुत ही अच्छा रिजल्ट दे रहा है। 1. स्वास्थ्य के लिए: होली की राख को आयुर्वेदिक औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है, जिसका माना जाता है कि यह त्वचा स्वास्थ्य, गठिया, और अन्य रोगों के इलाज में मदद कर सकता है. 2. सुंदर त्वचा: होली की राख को त्वचा की साफ़-सफाई के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है, और यह त्वचा को नरम और चमकदार बनाने में मदद कर सकता है. 3. घरेलू उपयोग: होली की राख को घरेलू नुस्खों में भी शामिल किया जा सकता है, जैसे कि दांतों की सफाई और मुंह के स्वास्थ्य के लिए. 4. वास्तु शास्त्र: होली की राख को वास्तु शास्त्र के हिसाब से घर में रखना में बहुत ही अच्छा माना जाता है। इसका मैं खुद अनुभव किया हुआ है। 🌱 पौधों में होली की राख के फायदे: पोटैशियम का अच्छा स्रोत राख में प्राकृतिक पोटैशियम होता है, जो फूल, फल और पौधे की मजबूती बढ़ाने में मदद करता है। मिट्टी की अम्लीयता कम करती है राख क्षारीय होती है, जिससे अम...

औषधि वाटिका कम म्यूज़ियम का निर्माण 🌿

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श्री सरस्वती विद्या मंदिर स्थान आदिपुर, पूर्व कच्छ विभाग, गुजरात प्रांत औषधि वाटिका कम म्यूज़ियम का निर्माण केवल एक परियोजना नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य और संस्कृति का एक पवित्र यज्ञ है। एक ही विद्यालय में तीन औषधि वाटिकाओं का निर्माण विद्यार्थियों के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला के समान है। यहाँ बच्चों को प्रकृति, आयुर्वेद और स्वावलंबन का सच्चा पाठ मिलेगा। ओवरहेड टैंक के वेस्ट पानी से सिंचाई की सुविधा तैयार की जा रही है, जिससे यह हरियाली हमेशा जीवंत बनी रहेगी। यह प्रयास आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी सिखाएगा। आइए, प्रकृति से जुड़कर स्वस्थ और संस्कारी समाज के निर्माण में सहभागी बनें। विद्यालय के निदेशक महोदय, प्रधानाचार्य और सभी आचार्यों को इस कार्य के लिए हार्दिक बधाई। 🌿🌱

होली उत्सव में बच्चे खुद नेचुरल कलर कैसे बनाएं इसके लिए “प्राकृतिक होली रंग प्रशिक्षण” प्रकल्प

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नमस्कार मेरा नाम उमेश सोन्डागर है,  मैं हर साल होली के उत्सव के लिए खुद ही नेचुरल कलर बनाता हूं। होली के उत्सव के लिए नेचुरल कलर कैसे बनाएं वह हम इस ब्लॉग के माध्यम से सिखाएंगे। होली के लिए दो टाइप के कलर हम बनाना सीखेंगे 1. पानी से खेलने वाले प्राकृतिक कलर 2. छिड़कने वाले प्राकृतिक कलर 1. पानी में खेलने वाले प्राकृतिक कलर कैसे बनाएं तीन गुड़हल (જાસુદ) के फूल,  पांच गेंदा (ગલગોટા) के फूल,  दस गुलाब के फूल,  दस पलाश (કેસુડા) के फूल  यह चार प्रकार के फूल को दो दिन धूप में या छांव में सुखाएं। पूरी तरह सूख जाए उसके बाद मिक्सर में पीस लें। एक चम्मच सुखड या चंदन पाउडर अगर मिले तो डाल दे। यह सब पाउडर को कॉटन के कपड़े में डाल के छोटी गठरी बना ले। रात को एक बाल्टी पानी में यह पाउडर वाली गठरी डाल दे। सुबह इस गठरी को दो-तीन बार निचोड़ ले। तैयार हो गया होली के पानी वाला कलर। 2. छिड़कने वाले प्राकृतिक कलर चंदन पाउडर और गुलाब की पंखुड़ी को मिक्सर में क्रश करें और गुलाबी रंग तैयार चंदन या सुखड पाउडर में चुकंदर (બીટ ) का पानी डाल दे मरून कलर तैयार पेड़ के पत्ते को छांव में सुख...

उत्तरायण मनाएँ, लेकिन जिम्मेदारी के साथ 🌞🪁

उत्तरायण मनाएँ, लेकिन जिम्मेदारी के साथ 🌞🪁 चाइनीज़ दोरी को “ना” कहें – जीवन को “हाँ” कहें उत्तरायण केवल पतंग उड़ाने का पर्व नहीं है, यह संस्कृति, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का उत्सव है। इस दिन आकाश रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है और हर चेहरे पर मुस्कान होती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक खतरनाक चीज़ इस त्योहार की खुशी को चोट पहुँचा रही है — चाइनीज़ दोरी (नायलॉन/मांझा)। चाइनीज़ दोरी: एक अदृश्य खतरा ⚠️ चाइनीज़ दोरी बहुत पतली, तेज़ और मजबूत होती है। यही कारण है कि यह: 🐦 पक्षियों के लिए जानलेवा साबित होती है। 🧒 बच्चों और युवाओं को गंभीर चोट पहुँचा सकती है। 🏍️ दोपहिया वाहन चालकों की जान तक ले चुकी है। 🌳 पर्यावरण को नुकसान पहुँचाती है। एक पल की लापरवाही किसी के पूरे जीवन को बदल सकती है। विद्यार्थी क्या कर सकते हैं? 🌱 विद्यार्थी देश का भविष्य हैं। आपकी छोटी-सी समझदारी बड़ा बदलाव ला सकती है। ✔️ केवल सूती (कॉटन) दोरी का उपयोग करें ❌ चाइनीज़ दोरी को साफ़ मना करें 🐦 घायल पक्षी दिखें तो बड़ों या एनजीओ को सूचित करें 👨‍👩‍👧 अपने परिवार और दोस्तों को जागरूक करें 📢 स्कूल और समाज में सेफ प...

विद्या भारती पर्यावरण विभाग पूर्व कच्छ- गुजरात प्रांत द्वारा ग्रीन भारत प्रकल्प

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विद्या भारती पर्यावरण विभाग पूर्व कच्छ- गुजरात प्रांत द्वारा ग्रीन भारत प्रकल्प   मानसून के अंदर ज्यादा से ज्यादा प्लांटेशन हो सके इसके लिए हमने पूरे साल देसी, और दुर्लभ प्रजाति के वनस्पति और औषधि बीज कलेक्शन किए हैं। सिर्फ बीज डिस्ट्रीब्यूशन करना हमारा हेतु नहीं है, बीज देने के बाद प्रॉपर गाइडलाइन, प्लांटेशन तकनीक और उसमें अगर कहीं प्रॉब्लम होता है तो हम मार्गदर्शन भी देते हैं। हमारी टीम में 30 से 50 साल का प्लांटेशन एक्सपीरियंस , बीज की पहचान वाले सेवा भावी पर्यावरण प्रेमी की टीम है। बीज डिस्ट्रीब्यूशन के बाद हम ब्लॉग के माध्यम से पूरा प्लांटेशन तकनीक सीखाने का प्रयत्न करते हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा सक्सेस प्लांटेशन हो सके। उमेश सोंडागर - औषधि बीज बैंक  प्रमुख पर्यावरण विभाग  विद्या भारती  पूर्व कच्छ गुजरात प्रांत  9726792900

औषधि और वनस्पति पहचान डिजिटल मीडिया प्रकल्प

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औषधि और वनस्पति पहचान डिजिटल मीडिया प्रकल्प। विद्या भारती पूर्व कच्छ पर्यावरण विभाग गुजरात प्रांत और मेरी औषधि बीज बैंक आदिपुर कच्छ द्वारा विद्यार्थी और अभिभावक हमारी पारंपरिक वनस्पति को पहचान सके इसके लिए हमने शॉर्ट वीडियो के माध्यम से बच्चों को सिखाना प्रारंभ किया है। हमारा हेतु यही है कि हमारे बच्चे और भारतीय भाई बहन हमारी पारंपरिक औषधि और वनस्पति को पहचाने, ज्यादा से ज्यादा प्लांटेशन करें, उसे रीजेनरेट करें, और उसका उपयोग करें। डिजिटल मीडिया के माध्यम से हम कुल चार प्रकार के प्रकल्प कर रहे हैं। 1. वनस्पति और औषधि पहचान इंस्टाग्राम वीडियो सीरीज इंस्टाग्राम वीडियो लिंक यहां क्लिक करें 2. वनस्पति और औषधि पहचान फेसबुक रील वीडियो सीरीज फेसबुक वीडियो लिंक यहां क्लिक करें 3. यू ट्यूब द्वारा पर्यावरण संबंधित प्रवृत्ति सीखाने की जानकारी यू ट्यूब वीडियो लिंक यहां क्लिक करें 4. ब्लॉग माध्यम - सिर्फ एक सिंगल क्लिक से आप हमारी पूरी प्रवृत्ति का वृत देख सकते हैं, इसमें प्रकल्प से प्रकल्प की पूरी जानकारी वृत और फोटोग्राफ के साथ प्रचार प्रसार करते हैं। ब्लॉग लिंक यहां क्लिक करें Project By Umesh ...

के.पी.सी.ए. सरस्वती विद्यालय एवं श्री नालंदा माध्यमिक विद्यालय, भचाऊ 50 पौधों का संयुक्त वृक्षारोपण

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पर्यावरण संवर्धन की दिशा में विद्यार्थियों की अनुकरणीय पहल संयुक्त वृक्षारोपण कार्यक्रम में 50 पौधे रोपे गए शनिवार, 26 जुलाई 2025 को एक सराहनीय और प्रेरणादायक पहल के अंतर्गत के.पी.सी.ए. सरस्वती विद्यालय (कक्षा 6 से 8) तथा श्री नालंदा माध्यमिक विद्यालय, भचाऊ (कक्षा 9 से 10) के विद्यार्थियों ने संयुक्त रूप से वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लिया। यह आयोजन प्रकृति और पर्यावरण के प्रति विद्यार्थियों की जागरूकता एवं जिम्मेदारी को दर्शाता है। कार्यक्रम का संचालन व मार्गदर्शन सह प्रधानाचार्य खुशबू बेन पंडया, वर्षाबेन पटेल, श्री बलभद्रसिंह झाला, श्री सवजीभाई बारूपार, श्री सेंधाजी गुरुजी तथा  अन्नपूर्णा दीदी द्वारा किया गया। इन सभी मार्गदर्शकों ने न केवल बच्चों को वृक्षारोपण की तकनीकी जानकारी दी, बल्कि पेड़ों के महत्व, उनकी सुरक्षा तथा जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के बारे में भी जागरूक किया। विद्यार्थियों को चार समूहों में बाँटकर वृक्षारोपण की प्रक्रिया आरंभ की गई। प्रत्येक समूह ने समर्पण और उत्साह के साथ मिलकर कार्य किया। इस अभियान के अंतर्गत कुल 50 विभिन्न प्रकार के छायादार व औषधीय वृक्ष ...

हरियाली क्रांति वर्ष : विद्यालय से उठी पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल -श्री सरस्वती विद्या मंदिर आदीपुर, गुजरात प्रांत

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जैनाचार्य अजरामर श्री सरस्वती विद्यालय - स्थान आदिपुर पूर्व कच्छ गुजरात प्रांत  जैनाचार्य अजरामर श्री सरस्वती विद्यालय, आदिपुर में इस वर्ष को "हरियाली क्रांति" वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत विद्यालय में प्रत्येक छात्र और आचार्य के जन्मदिन के अवसर पर उनकी ओर से एक गमले में पौधा रोपण करने की शुरुआत की गई है। हरियाली क्रांति अभियान की विशेषताएं और उद्देश्य अभियान की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि यह व्यक्तिगत और भावनात्मक स्तर पर विद्यार्थियों एवं आचार्यों को प्रकृति से जोड़ता है। पौधारोपण केवल एक कर्मकांड न बनकर, एक आत्मीय अनुभव बन जाता है जब कोई बालक अपने जन्मदिवस को एक नए जीवन (पौधे) के जन्म के साथ मनाता है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना नहीं है, बल्कि बच्चों में प्रकृति प्रेम, सेवा भाव, जिम्मेदारी, और स्थायित्व का संस्कार विकसित करना है। विद्यालय का मानना है कि जब कोई बच्चा स्वयं पौधे को लगाता है, उसे पानी देता है, उसकी वृद्धि को देखता है, तो वह जीवन और प्रकृति की मौलिक एकता को अनुभव करता है। समाज के लिए प्रेरणा यह हरियाली क्रांति अभियान अब एक...

दिव्यभास्कर द्वारा "एक वृक्ष एक जीवन" प्रकल्प के अंतर्गत तुलसी बीज प्लांटेशन

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दिव्यभास्कर द्वारा "एक वृक्ष एक जीवन" प्रकल्प के अंतर्गत तुलसी बीज वाला पेज प्रदान किया गया था। आज जैनाचार्य अजरामर श्री सरस्वती विद्यामंदिर, आदिपुर में उस पेज को टुकड़ों में काटकर बगीचे में तुलसी का वावेतर (रोपण) किया गया।

श्री सरस्वती विद्या मंदिर आदिपुर में वृक्षारोपण

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श्री सरस्वती विद्या मंदिर आदिपुर में वृक्षारोपण 15.07.2025 को NGO स्पोन्सर से वृक्षारोपण किया गया।  जिसके प्रेस नोट आर्टिकल 

श्री सरस्वती विद्या मंदिर अंतरजाल वृक्षारोपण

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दिनांक 16.7.2025 को श्री सरस्वती विद्या मदिर अंतरजाल में छात्रों और आचार्य द्वारा प्लांटेशन 

5 जून विश्व पर्यावरण दिवस पर एक कुटुम्ब एक वृक्ष एक प्रकल्प

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5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के शुभ अवसर पर एक कुटुंब एक वृक्ष बोए और बडा करें उसके लिए प्रेरणादाई जागृति कार्यक्रम किया हे।

संजीवनी हरित क्रांति प्रकल्प

संजीवनी हरित क्रांति प्रकल्प *विद्या भारती पूर्व कच्छ पर्यावरण विभाग, गुजरात प्रांत* द्वारा इस बार मानसून में विशेष प्रकल्प का आयोजन किया है।  ऐसी औषधि जो लुप्त हो गई है, या लुप्त होने की कगार पर है, जो किसी भी प्रकार की महामारी या अकाल में इंसान और पशुओं को भोजन और स्वस्थ होने का सहारा दे सके। ऐसी औषधि की पहचान करके उसके बीज कलेक्शन करके इस बार हमने मानसून में मेगा प्लांटेशन प्रोजेक्ट का आयोजन का प्रकल्प है।  इसके लिए मे लास्ट आठ महीना से मेहनत कर रहा हु। विद्या भारती पूर्व कच्छ के छात्रों से लेकर अधिकारीजी, हम आपसे सहयोग का आह्वान करते हैं। आपके पास ऐसी औषधि की जानकारी या बीज है तो हमें पहुंचाने की कृपा करें।  बीज कलेक्शन के बाद इसको प्रक्रिया करके एयरटाइट बर्तन में एटमॉस्फेयर इफेक्ट ना लगे इस तरह से हम इसका संग्रह करते हैं। जहां जरूरत है, या अगर हमसे कोई बीज मंगवाते हैं, वहां हम प्लांटेशन का मार्गदर्शन देकर बीज को पहुंचाएंगे। मानसून में हम यह प्रकल्प हम अखिल भारतीय स्तर पर करेंगे, इस अवकाश के समय में राष्ट्र विकास में आपसे हम सहयोग की अपेक्षा रखते हैं। विद्या भारती पू...

દિવ્યભાસ્કર વૃક્ષ જીવન પ્રકલ્પ

 વિદ્યા ભારતી -પર્યાવરણ વિભાગ પૂર્વ કચ્છ, ગુજરાત પ્રાંત દ્વારા આહવાન કરવામાં આવે છે કે તારીખ ૧૮.૦૭.૨૦૨૫ શુક્રવારના દિવ્ય ભાસ્કરમાં પ્લાન્ટેશન માટે એક બીજ પેજ આપવામાં આવ્યું છે. આ પેજના પટ્ટા નું કટીંગ કરી, તેના નાના ટુકડા કરી જમીનમાં કે કુંડામાં વાવેતર કરીએ. દરેક વિદ્યાલયના પ્રધાનચાર્ય, આચાર્યોને વિનંતી કે આ શુભ પર્વને રાષ્ટ્ર વિકાસ ઉત્સવ તરીકે ઉજવીએ. દિવ્ય ભાસ્કર બીજ પેજ કટીંગનું વાવેતર તથા વિદ્યાલયોમાં વૃક્ષારોપણ પ્રવૃત્તિ કરી ગુરુઓ દ્વારા વિદ્યાર્થીઓને ગુરુદક્ષિણાનો નવો વિચાર આપવામાં આવે. દરેક વાલીઓને વિનંતી કે દિવ્ય ભાસ્કરનું બીજ પેજ ના ટુકડા કરી પોતાના ઘરે કુંડામાં વાવેતર કરે, અથવા પોતાના બાળકો દ્વારા વાવેતર કરાવે. દિવ્ય ભાસ્કરના રાષ્ટ્ર વિકાસના આ કાર્યની વિદ્યા ભારતી, ગુજરાત પ્રાંત પ્રશંસા કરે છે. આપના આ પ્રયત્નના અમલીકરણ માટે વિદ્યાભારતી ગુજરાત પ્રાંત કટિબદ્ધ છે. દરેક વિદ્યાલયને વિનંતી કે આજના પર્યાવરણ લક્ષી પ્રવૃત્તિના ફોટા વિદ્યાલયના નામ, સ્થાન સાથે whatsapp નંબર 9726792900 મોકલે. ઉમેશ સોન્ડાગર  વિદ્યા ભારતી -પર્યાવરણ વિભાગ પૂર્વ કચ્છ 9726792900