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Showing posts from March, 2026

विश्व गौरैया (ચકલી) दिवस पर विद्या भारती के छात्रों के लिए संदेश

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विश्व गौरैया दिवस पर विद्या भारती के छात्रों के लिए संदेश प्रिय छात्रों, 20 मार्च को हम विश्व गौरैया दिवस मनाते हैं, जो हमें प्रकृति और पक्षियों के संरक्षण का महत्व सिखाता है। गौरैया, जो कभी हर घर, आंगन और पेड़ों पर चहकती थी, अब दुर्लभ होती जा रही है। इसका मुख्य कारण आधुनिक जीवनशैली, पेड़ों की कटाई, मोबाइल टावरों से निकलने वाला रेडिएशन और रासायनिक कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग है। गौरैया केवल एक छोटी चिड़िया नहीं, बल्कि हमारे पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह फसलों को हानिकारक कीटों से बचाती है और पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखती है। यदि हमने अभी कदम नहीं उठाए, तो आने वाली पीढ़ियों को यह सुंदर पक्षी देखने को नहीं मिलेगा। आप सभी छात्र अपनी जिम्मेदारी निभाएं—अपने घर और स्कूल के आसपास छोटे जल पात्र रखें, बागवानी करें, पेड़ लगाएं और पक्षियों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाएं। घोंसले बनाने के लिए घास और लकड़ी के टुकड़े उपलब्ध कराएं। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का कम उपयोग करें। आइए, इस विश्व गौरैया दिवस पर संकल्प लें कि हम प्रकृति और पक्षियों की रक्षा करेंगे, ताकि हमारी धरती सदैव हरियाली और ...

विद्या भारती पर्यावरण विभाग पूर्व कच्छ, गुजरात प्रांत का वेस्ट में से बेस्ट “बर्ड होम प्रोजेक्ट”

नमस्कार,  बच्चों, वैकेशनमें अपना समय मोबाइल और खेलकूद के साथ कुदरत की दी गई चीज को बचाने और बढ़ाने के लिए भी कुछ समय दे। पर्यावरण का बैलेंस रहेगा तभी राष्ट्र और विश्व विकास करेगा।  जिस तरफ पेड़ कट रहे हैं उससे लगता है अगले कुछ सालों में पंछियों को घोसला बनाने के लिए जगह नहीं मिलेगी। इस बात को ध्यानमें रखते हुए एक प्रोजेक्ट का आयोजन किया है। अपने घर में कोई वेस्ट  बोकस से पंछी का घर कैसे बनाएं इसका मार्गदर्शन वीडियो नीचे लिंक में रखा है। और स्टूडेंट एक घर जरूर बनाएं। वीडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें।👇 वीडियो के लिए यहां क्लिक करें उमेश सोन्डागर (योग शिक्षक, गिलोय प्रचारक) प्रमुख, विद्या भारती-पर्यावरण विभाग पूर्व कच्छ- गुजरात प्रांत। India M- +91 9726792900

बीज प्रदर्शनी

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विद्या भारती पूर्व कच्छ पर्यावरण विभाग, गुजरात प्रांत द्वारा 10 जनवरी 2026 को अजरामर श्री सरस्वती विद्या मंदिर, आदिपुर में छात्रों के लिए बीज प्रदर्शनी और पहचान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार के बीजों की पहचान, उनके महत्व और प्रकृति से जुड़ाव के बारे में जागरूक करना था। छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर कई औषधीय, फल-फूल और वृक्षों के बीजों को जाना और समझा। ऐसे कार्यक्रम बच्चों में पर्यावरण के प्रति प्रेम, संरक्षण की भावना और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। यह पहल भविष्य की पीढ़ी को हरित और जागरूक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 🌱🌿

वेस्ट प्लास्टिक केन और जार से पक्षियों का घोंसला बनाएं

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प्लास्टिक कचरा पर्यावरण के लिए बड़ी समस्या है, लेकिन विद्यार्थी इसे रचनात्मक तरीके से उपयोग कर सकते हैं। वेस्ट प्लास्टिक केन और बरणियों से पक्षियों के लिए सुंदर VIP घर बनाना एक प्रेरणादायक पहल है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ पक्षियों को सुरक्षित आश्रय मिलता है और विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी बढ़ती है। मैं हर साल ऐसे 50 घोसले बनाता हूं🌿🐦 उमेश सोंडागर पूर्व कच्छ पर्यावरण विभाग   गुजरात प्रांत

संतरे के छिलकों से बगीचे की सेहत सुधारें और कीटों को दूर भगाएँ

🌱संतरे के छिलकों से बगीचे की सेहत सुधारें और कीटों को दूर भगाएँ संतरे के छिलके केवल कचरा नहीं, बल्कि आपके बगीचे के लिए प्राकृतिक वरदान हैं। इनमें मौजूद पोषक तत्व मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं और उनकी तेज़ खुशबू कई हानिकारक कीटों को दूर रखती है। *खाद के रूप में उपयोग:* सूखे संतरे के छिलकों को बारीक काटकर या पीसकर कम्पोस्ट में मिलाएँ। इससे मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम की मात्रा बढ़ती है, जो पौधों की जड़ों को मजबूत बनाती है। *कीट नियंत्रण:* संतरे के छिलकों की खुशबू एफिड्स और चींटियों जैसे कीटों को पसंद नहीं होती। छिलकों को पौधों के आसपास रखने से कीट स्वाभाविक रूप से दूर रहते हैं। 👉 ध्यान रखें: हमेशा जैविक (ऑर्गेनिक) संतरे के छिलकों का ही उपयोग करें। छिलकों को फेंकने के बजाय अपनाएँ और अपने बगीचे को बनाएं पूरी तरह प्राकृतिक और स्वस्थ। 🌿 उमेश सोन्डागर  पूर्व कच्छ पर्यावरण विभाग  गुजरात प्रांत

होली की राख (Ash) के फायदे

होली की राख (Ash) के फायदे मैं हर साल करीबन 5 किलो जितनी होली की राख होली के नेक्स्ट डे छान के कलेक्ट करके रखता हूं और उसका औषधि प्रयोग करता हूं। स्किन इन्फेक्शन और स्किन ग्लो मैं यह बहुत ही अच्छा रिजल्ट दे रहा है। 1. स्वास्थ्य के लिए: होली की राख को आयुर्वेदिक औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है, जिसका माना जाता है कि यह त्वचा स्वास्थ्य, गठिया, और अन्य रोगों के इलाज में मदद कर सकता है. 2. सुंदर त्वचा: होली की राख को त्वचा की साफ़-सफाई के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है, और यह त्वचा को नरम और चमकदार बनाने में मदद कर सकता है. 3. घरेलू उपयोग: होली की राख को घरेलू नुस्खों में भी शामिल किया जा सकता है, जैसे कि दांतों की सफाई और मुंह के स्वास्थ्य के लिए. 4. वास्तु शास्त्र: होली की राख को वास्तु शास्त्र के हिसाब से घर में रखना में बहुत ही अच्छा माना जाता है। इसका मैं खुद अनुभव किया हुआ है। 🌱 पौधों में होली की राख के फायदे: पोटैशियम का अच्छा स्रोत राख में प्राकृतिक पोटैशियम होता है, जो फूल, फल और पौधे की मजबूती बढ़ाने में मदद करता है। मिट्टी की अम्लीयता कम करती है राख क्षारीय होती है, जिससे अम...

औषधि वाटिका कम म्यूज़ियम का निर्माण 🌿

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श्री सरस्वती विद्या मंदिर स्थान आदिपुर, पूर्व कच्छ विभाग, गुजरात प्रांत औषधि वाटिका कम म्यूज़ियम का निर्माण केवल एक परियोजना नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य और संस्कृति का एक पवित्र यज्ञ है। एक ही विद्यालय में तीन औषधि वाटिकाओं का निर्माण विद्यार्थियों के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला के समान है। यहाँ बच्चों को प्रकृति, आयुर्वेद और स्वावलंबन का सच्चा पाठ मिलेगा। ओवरहेड टैंक के वेस्ट पानी से सिंचाई की सुविधा तैयार की जा रही है, जिससे यह हरियाली हमेशा जीवंत बनी रहेगी। यह प्रयास आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी सिखाएगा। आइए, प्रकृति से जुड़कर स्वस्थ और संस्कारी समाज के निर्माण में सहभागी बनें। विद्यालय के निदेशक महोदय, प्रधानाचार्य और सभी आचार्यों को इस कार्य के लिए हार्दिक बधाई। 🌿🌱