विश्व गौरैया (ચકલી) दिवस पर विद्या भारती के छात्रों के लिए संदेश

विश्व गौरैया दिवस पर विद्या भारती के छात्रों के लिए संदेश

प्रिय छात्रों,

20 मार्च को हम विश्व गौरैया दिवस मनाते हैं, जो हमें प्रकृति और पक्षियों के संरक्षण का महत्व सिखाता है। गौरैया, जो कभी हर घर, आंगन और पेड़ों पर चहकती थी, अब दुर्लभ होती जा रही है। इसका मुख्य कारण आधुनिक जीवनशैली, पेड़ों की कटाई, मोबाइल टावरों से निकलने वाला रेडिएशन और रासायनिक कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग है।

गौरैया केवल एक छोटी चिड़िया नहीं, बल्कि हमारे पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह फसलों को हानिकारक कीटों से बचाती है और पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखती है। यदि हमने अभी कदम नहीं उठाए, तो आने वाली पीढ़ियों को यह सुंदर पक्षी देखने को नहीं मिलेगा।

आप सभी छात्र अपनी जिम्मेदारी निभाएं—अपने घर और स्कूल के आसपास छोटे जल पात्र रखें, बागवानी करें, पेड़ लगाएं और पक्षियों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाएं। घोंसले बनाने के लिए घास और लकड़ी के टुकड़े उपलब्ध कराएं। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का कम उपयोग करें।

आइए, इस विश्व गौरैया दिवस पर संकल्प लें कि हम प्रकृति और पक्षियों की रक्षा करेंगे, ताकि हमारी धरती सदैव हरियाली और चहचहाहट से भरपूर रहे।

"गौरैया बचेगी, तो प्रकृति बचेगी!"

उमेश सोंडागर 
पूर्व कच्छ पर्यावरण विभाग 
गुजरात प्रांत 
9726792900

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