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Showing posts from 2023

इस दिपावली उत्सव की रंगोली के लिए प्राकृतिक फूल,पत्तियों और जड़ से बनाये कलर

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दिवाली उत्सव की रंगोली के लिए प्राकृतिक फूल और पत्तियों और जड़ से बनाये कलर मै हर साल होली के कलर और दीपावली के रंगोली के कलर फूल, पत्ती, पौधे की जड़ और अन्य नेचरल चीज से बनाता हूं और युझ करता हूं। "प्रकृति के नजदीक रहना" यह सिर्फ बातो में नहीं, नयी सोच के साथ कदम भी उठाए। वुडन कलर - लकड़ी के दस्त से बनाया पीला कलर - हल्दी से बनाया केसरि कलर - पलाश फूल से बनाया सफेद कलर - संग मरमर आरस पत्थर से बनाया गुलाबी कलर - गुलाब की पंखुड़ियां से बनाया हरा कलर - हरी पत्तियां से बनाया लाल कलर - हर्बल गुलाल से बनाया काला कलर - चारकोल से बनाया लाइट ग्रे कलर - राख (Ash) से बनाया मेरून कलर - गुड़हल के फूल से बनाया क्रीम कलर - पौधे के झड़ के पाउडर से बनाया कलर बनाने का तरीका: रंग बनाने के लिए आपको फूल, पत्ते और जड को छाव में सुखाना होगा। यह 1 दिन में अच्छे से सूख जाएगा। फिर इन्हें मिक्सर में क्रश कर लें। 50 ग्राम जितना बालु को छान लें और उसमें 50 ग्राम जितना ऊपर के हिसाब से जो कलर बनाना है चीज डालें । इसे मिक्सर में पीस लें, तो रंग तैयार हो जाएगा। हाथ से बनाए गए रंगोली बनाने का मजा कुछ और ही ह...

विद्या भारती पूर्व कच्छ पर्यावरण विभाग- गुजरात प्रांत के ब्लॉग को भारत सहित *विश्व के 39 देश* के आज *10,000* रीडर कंप्लीट हुए।

विद्या भारती पूर्व कच्छ पर्यावरण विभाग- गुजरात प्रांत के ब्लॉग को भारत सहित *विश्व के 39 देश* के आज *10,000* रीडर कंप्लीट हुए। 13.09.2022 को विद्या भारती पूर्व कच्छ पर्यावरण विभाग के ब्लॉग की शुरुआत हुई थी। आज 1 साल में भारत सहित विश्व के 39 देश के पर्यावरण प्रेमी, किसान, छात्रों, आचार्य,अभिभावकों ने इस ब्लॉग से प्रेरणा ली है। ब्लॉग में हेल्थ टिप्स, मिट्टी की पहचान, अलग-अलग तकनीक से बीज प्लांटेशन टेक्निक, पौधों में रोग की पहचान, औषधि प्लांटेशन, विद्या भारती विद्यालय में पर्यावरण प्रवृत्तियां, दुर्लभ और लुप्त औषधि के औषधि गार्डन टेक्निक, जीरो कोस्ट से खाद बनाने की टेक्निक, विद्यालयों के अलावा दूसरी जगह पर प्लांटेशन का कार्य दर्शाया गया है। पूर्व कच्छ विभाग ने जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्लांटेशन प्रकल्प किए हैं उसको भी दर्शाया गया है। विभाग इस सिद्धि के लिए विद्या भारती के पदाधिकारी, नियामक श्री, प्रधानाचार्य, आचार्य अभिभावकों, छात्रों, माॅग दशकों और पाठकों का आभार व्यक्त करता है। आभारी : उमेश सोन्डागर - प्रमुख भगवानभाई चौधरी - सह प्रमुख विद्या भारती,  पर्यावरण विभाग -पूर्व कच्छ,...

શ્રી સરસ્વતી વિદ્યામંદિર આદિપુરમાં પ્રકૃતિ વંદન કાર્યક્રમ

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૩૧.૦૮.૨૦૨૩ શ્રી સરસ્વતી વિદ્યા મંદિર આદિપુર સ્થાનમાં પ્રકૃતિ વંદન કાર્યક્રમની ઉત્સાહભેર ઉજવણી કરી. મુખ્ય મહેમાન શ્રી, ટ્રસ્ટીશ્રીઓ, પૂર્વ કચ્છ વિભાગના પર્યાવરણ પ્રમુખ અને ઉપપ્રમુખ, વ્યવસ્થાપક, શિશુ મંદિર, માધ્યમિક, અને ઉચ્ચતર માધ્યમિકના પ્રધાનાચાર્ય, આચાર્ય અને વિદ્યાર્થીઓએ ઉત્સાહભેર ગાયત્રી મંત્રોચ્ચાર સાથે વૃક્ષારોપણ કર્યું હતું. ઉમેશ સોંડાગર - પ્રમુખ  ભગવાનજીભાઈ ચૌધરી - સહપ્રમુખ વિદ્યા ભારતી - પૂર્વ કચ્છ. પર્યાવરણ વિભાગ. ગુજરાત. પર્યાવરણની વધુ માહિતી માટે ક્લિક કરો

श्री गजवानी इंटरनेशनल स्कूल, गांधीधाम मे पर्यावरण जागृती वर्कशॉप

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दिनांक 24.08.2023 श्री गजवानी इंटरनेशनल स्कूल, 05.10.2023 श्री गजवानी माध्यमिक स्कूलगांधीधाम सोशयल साइंस डिपार्टमेंट द्वारा स्टूडेंट और शिक्षकों के लिए पर्यावरण और हेल्थ अवेयरनेस वर्कशॉप का आयोजन किया था। मिट्टी की पहचान, प्लांटेशन टेक्निक, खाद बनाने का तरीका, पत्ता देखकर उसमें पोषक तत्वों की पहचान कैसे करें, पेड़ पौधों की ट्रीटमेंट और पर्यावरण को कैसे बचाया जाए उस विषय पर वक्तव्य दिया। आयुर्वेद औषधि के बीज और आयुर्वेद का महत्व समझाया गया। उच्चतर माध्यमिक क्लास के बच्चों को अचीवमेंट मोटिवेशनल टेक्निक्स सिखाई गई। बच्चों और शिक्षकों को पेड़ पौधे के बीज, आयुर्वेद औषधि बीज की पहचान हो इसे हेतू से बीज डेमोंसट्रेशन रखा था। बच्चों को नेचुरल होली के कलर कैसे बनाने का तरीका और डेमोंसट्रेशन दिया। फूलों से नेचुरल परफ्यूम कैसे बनाया जाए और बच्चों को सिखाया। दुर्लभ लुप्त जाति के बीज, नेचुरल होली के कलर, प्लांटेशन टूल्स, नेचुरल प्रोडक्ट्स डेमोंसट्रेशन द्वारा दिखाया गया। वर्कशॉप के आयोजन  दीपा कल्याणी मेम, आशा जोशी मेम और मोनी सिंह मैं के सहयोग से हुआ। प्रिंसिपल श्रीमती शुभ लक्ष्मी राजा मेम का आभ...

વિદ્યા ભારતી ગુજરાત પ્રાંતની વિદ્યાલયો માટે અમૃત વૃક્ષ સરગવા વાવેતર પ્રકલ્પ

સ્વાસ્થ્ય માટેનુ અમૃત એટલે સરગવો. સરગવાની પાન, શિંગ, ફૂલ, ગુંદ, છાલ બધું જ સ્વાસ્થ્ય માટે ઉપયોગી છે. એમાં પણ કડવા સરગવાનો ફાયદો વિશેષ છે. શુલ્ક : ૩૦ ₹ પ્રતિ દાંડી કુરિયર ચાર્જ અલગ માઘા નક્ષત્ર ચાલુ થઈ ગયું છે. 17.08.2023 થી 31.08.2023 વાવેતર માટેનો ઉત્તમ સમય છે. આપને વાવેતર માટે કડવા અથવા મીઠા સરગવાની દાંડી જોઈએ તો ગુજરાતમાં કોઈ પણ સ્થળે કુરિયર ૨૪ કલાકમા પહોંચાડશુ. ઉમેશ સોંન્ડાગર ( યોગ શિક્ષક, ગિલોય પ્રચારક) પ્રમુખ, પર્યાવરણ વિભાગ, વિદ્યા ભારતી -પૂર્વ કચ્છ 97267 92900

વિદ્યા ભારતી ગુજરાત પ્રાંતની વિદ્યાલયો માટે અમૃત ઔષધ પ્લાન્ટેશન કીટ પ્રકલ્પ

વિદ્યાલયોમાં અને વાલીઓના ઘરે વધુ ઔષધી પ્રાંતેશન થાય તે હેતુથી વાલી મિટિંગમાં વાલીઓને આપવા અથવા વિદ્યાલયમાં વાવવા માટે એક પ્લાન્ટેશન કીટ બનાવી છે. 50 ગિલોયની દાંડી, 50 થી 60 વર્ષ જુના દેશી લીમડાના અને 200 બીજ, શ્યામ તુલસીના 200 બીજ. કોઈ વિદ્યાલય ને જરૂર હોય તો સંપર્ક કરે કુરિયરથી આપને પહોંચાડી દઈશું. કીટ શુલ્ક - ૧૫૦/- ( કુરિયર ચાર્જ અલગ) ઉમેશ સોંન્ડાગર પ્રમુખ  પર્યાવરણ વિભાગ પૂર્વ-કચ્છ આદિપુર. M- 9726792900

बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास कैसे करें

बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास कैसे करें आजकल बच्चों की हालत ऐसी है कि आने जाने के टाइम के साथ 7 घंटे स्कूल में जाते हैं, 2 से 3 घंटे ट्यूशन में जाते हैं फिर म्यूजिक क्लास कराटे क्लास या अन्य कला सीखने में जाते हैं। मां-बाप की ख्वाहिश होती है कि बच्चा पढ़ाई के साथ सब में एक्सपर्ट हो। यही मानसिकता बच्चे को मानसिक और शारीरिक कमजोर बनाती है। आम इंसान 8 घंटे की नौकरी में थक जाता है, और कुछ मां-बाप बच्चों को 12 से 13 घंटा यह सब एक्टिविटीज करवाते हैं। मैंने बच्चों के स्कूल बैग का सर्वे किया है उसमें एवरेज वजन 8.800 Kg आ रहा है। कभी शांति से सोचिए कि आप अपने बच्चे को कौन सी दिशा में ले जा रहे हैं। बच्चों की यह परिस्थिति देखकर मैंने 3 महीना सर्वे किया है उसके बाद यह आर्टिकल बना रहा हूं। बच्चों का मानसिक विकास कैसे करें चैस एक बोर्ड गेम है बच्चों के बोलो हर रोज 15 से 30 मिनट खेलें। इसके अलावा हमारी पुरानी रमत है "नव काकरी"। यह गेम बहुत पुराना है, गुजरात में ज्यादा पहले खेला जाता था। 2 में से कोई भी 1 गेम बच्चे दो महीने तक खेलेंगे उसके बाद अब देखेंगे आपके बच्चों में पॉजिटिव एनर्जी, ...

विद्या भारती पूर्व कच्छ पर्यावरण विभाग गुजरात प्रांत - वर्तमान समय में आंख का एक रोग अभी बहुत कहर मचा रहा है जिसका नाम है Conjunctivitis. बच्चों में यह रोग ज्यादा दिखने मिल रहा है, इसमें क्या ख्याल रखें उसकी जानकारी के लिए ब्लॉग

वर्तमान समय में आंख का एक रोग अभी बहुत कहर मचा रहा है जिसका नाम है Conjunctivitis. इस रोग में आंख लाल हो जाती है, खुजली होती है, जलन होती है, कई बार इसमें सूजन भी आ जाती है। यह रोग चेपी है इसलिए देखने से या एक दूसरे की चीज छूने से यह ज्यादा हो रही है। बच्चों में यह रोग ज्यादा दिखने मिलता है क्योंकि उसको परहेज के बारे में पता नहीं होता है। इस रोग से कैसे बचे इसके ऊपर आज मैं एक आर्टिकल बना रहा हूं। Conjunctivitis के लक्षण: आंख गुलाबी या लाल हो जाना आंखों में जलन या खुजली आंखों से पानी या चिकना पदार्थ निकलना आंखों की पलकों में या ऊपर के भाग में सूजन आंखों से आंसू ज्यादा आना प्रकाश को ज्यादा ना देख पाना अगर यह रोग नहीं हुआ तो परहेज क्या करें जिससे आप इस रोग से बचें: ब्लैक कलर के अच्छे क्वालिटी का कांच के गॉगल्स पहने। बच्चों को बोले की स्कूल में किसी के साथ अपना नाश्ता शेयर ना करें। बच्चों को बोले कि अपने दोस्त या स्कूल में किसी से हाथ ना मिलाएं। बार-बार हैंडवाश या साबुन से हाथ धोये। Conjunctivitis के कोई भी लक्षण आंख में आपको हल्के से भी दिखे या ज्यादा दिखे तो क्या परहेज करें और क्या इलाज...

આજનો ગુરુપૂર્ણિમાનો ઉત્સવ માત્ર પૂજા અને વિદ્યાલય પૂરતો સીમિત ન રાખી રાષ્ટ્ર વિકાસ ઉત્સવ તરીકે ઉજવીએ

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આજનો ગુરુપૂર્ણિમાનો ઉત્સવ માત્ર પૂજા અને વિદ્યાલય પૂરતો સીમિત ન રાખી રાષ્ટ્ર વિકાસ ઉત્સવ તરીકે ઉજવીએ.  વિદ્યા ભારતી પ્રાંત ઉપાધ્યક્ષ શ્રીકેશુભાઈ મોરસાણીયાની દુરંદેશી અને પ્રગતિશીલ વિચારધારાના અમલીકરણ માટે વિદ્યા ભારતી -પર્યાવરણ વિભાગ પૂર્વ કચ્છ, ગુજરાત પ્રાંત દ્વારા આહવાન કરવામાં આવે છે કે તારીખ ૦૧.૦૭.૨૦૨૩ શનિવારના દિવ્ય ભાસ્કરમાં પ્લાન્ટેશન માટે એક બીજ પેજ આપવામાં આવ્યું છે. આ પેજના પટ્ટા નું કટીંગ કરી, તેના નાના ટુકડા કરી જમીનમાં કે કુંડામાં વાવેતર કરીએ. દરેક વિદ્યાલયના પ્રધાનચાર્ય, આચાર્યોને વિનંતી કે ગુરુપૂર્ણિમાના શુભ પર્વને રાષ્ટ્ર વિકાસ ઉત્સવ તરીકે ઉજવીએ. બિપરજોય વાવાઝોડાએ પર્યાવરણને જે નુકસાન કર્યું છે તેની ભરપાઈના ભાગરૂપે ગુરુપૂર્ણિમાના શુભ દિવસે દિવ્ય ભાસ્કર બીજ પેજ કટીંગનું વાવેતર તથા વિદ્યાલયોમાં વૃક્ષારોપણ પ્રવૃત્તિ કરી ગુરુઓ દ્વારા વિદ્યાર્થીઓને ગુરુદક્ષિણાનો નવો વિચાર આપવામાં આવે. દરેક વાલીઓને વિનંતી કે દિવ્ય ભાસ્કરનું બીજ પેજ ના ટુકડા કરી પોતાના ઘરે કુંડામાં વાવેતર કરે, અથવા પોતાના બાળકો દ્વારા વાવેતર કરાવે. દિવ્ય ભાસ્કરના રાષ્ટ્ર વિકાસના આ કાર્યની વિદ્યા ભારતી, ગુ...

विद्या भारती पर्यावरण विभाग- पूर्व कच्छ, गुजरात प्रांत द्वारा मॉनसून में शॉर्ट सर्किट से बचने के लिए जागृति अभियान

मॉनसून में शॉर्ट सर्किट से बचने के लिए आसान उपाय: मॉनसून के समय में घर, दुकान, फैक्ट्री, विद्यालय या कॉलेज में शॉर्ट सर्किट ज्यादा होता है, कभी-कभी स्विच में भी करंट आता है। शॉर्ट सर्किट की वजह से कभी बड़ी जानहानि भी हो जाती है। आज मैं आपको मॉनसून के समय में इलेक्ट्रिक सेफ्टी का बहुत आसान उपाय बता रहा हूं। मॉनसून के समय में इलेक्ट्रिशियन से सभी स्विच बोर्ड खुलवा ले और उसके अंदर मकड़ी के जाले होगे वह साफ करवा ले। मकड़ी के जाले अगर स्विच बोर्ड के अंदर हो गए तो उसके वजह से उसमें मोइसचर लगेगा और उसकी वजह से उसमें करंट पास होगा जिससे शॉर्ट सर्किट के चांस ज्यादा रहते हैं। मॉनसून के अंदर अफसर टीवी उड़ जाते हैं अगर आपके पास पुराना बड़ा टीवी है तो उसमें भी आप मकड़ी के जाले और और मिट्टी साफ करवा ले। मॉनसून में बाहर साइड के स्वीच बोॅड पर प्लास्टिक लगाले जिससे आपकी उंगली सीधा स्वीच के संपर्क में ना आए। आपको यह प्रैक्टिस हर साल करना है इससे आप शॉर्ट सर्किट से बचेंगे और माल हानि और जानहानि से भी बचेगे। उमेश सोन्डागर - प्रमुख श्री भगवानजीभाई चौधरी - सह प्रमुख  पर्यावरण विभाग विद्या भारती - पूर्व ...

5 जून 2023 विश्व पर्यावरण दिन के शुभ अवसर पर विद्या भारती पर्यावरण विभाग -पूर्व कच्छ, गुजरात प्रांत के विभाग में पर्यावरण प्रवृत्तिे

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5 जून 2023 विश्व पर्यावरण दिन के शुभ अवसर पर विद्या भारती पर्यावरण विभाग -पूर्व कच्छ, गुजरात  विभाग के विद्यालय में पर्यावरण प्रवृत्तिे का वृत श्रीसरस्वती विद्या मंदिर आदिपुर में दुर्लभ और विलुप्त देशी अनाज और मिलेट्स गार्डन कम म्यूजियम का निर्माण और 200 गिलोय की टहनी प्लांटेशन हेतु छात्रों को भेट मिलेट्स गार्डन-सह-संग्रहालय बनाने का उद्देश्य: 1. आहार में केमिकल और हाईब्रिड अनाज छोड़कर आज नहीं तो कल प्राचीन अनाजों की ओर रुख करना ही होगा। 2. हमारे छात्रों, अभिभावकों और स्थानीय निवासियों को हमारे प्राचीन अनाज और उनके स्वास्थ्य लाभों के बारे में पता चले ।  3. मिलेट्स मनुष्यों के साथ-साथ पशु-पक्षियों के लिए भी एक सकारात्मक आहार है।  4. हमारे गार्डन में मिलेट्स प्लांटेशन और बीज पर संशोधन करके राष्ट्र को बेहतरीन देसी बीज मिले उसका भी आयोजन है। 5. मिलेट्स की खेती बहुत कम पानी और कम मेहनत से की जा सकती है।              श्रीसरस्वती विद्या मंदिर आदिपुर श्रीमती एस.डी. धोलु सरस्वती विद्या मंदिर - कोटडा चकार ...