हरियाली क्रांति वर्ष : विद्यालय से उठी पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल -श्री सरस्वती विद्या मंदिर आदीपुर, गुजरात प्रांत


जैनाचार्य अजरामर श्री सरस्वती विद्यालय - स्थान आदिपुर पूर्व कच्छ गुजरात प्रांत 

जैनाचार्य अजरामर श्री सरस्वती विद्यालय, आदिपुर में इस वर्ष को "हरियाली क्रांति" वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है।
इसके अंतर्गत विद्यालय में प्रत्येक छात्र और आचार्य के जन्मदिन के अवसर पर उनकी ओर से एक गमले में पौधा रोपण करने की शुरुआत की गई है।

हरियाली क्रांति अभियान की विशेषताएं और उद्देश्य

अभियान की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि यह व्यक्तिगत और भावनात्मक स्तर पर विद्यार्थियों एवं आचार्यों को प्रकृति से जोड़ता है। पौधारोपण केवल एक कर्मकांड न बनकर, एक आत्मीय अनुभव बन जाता है जब कोई बालक अपने जन्मदिवस को एक नए जीवन (पौधे) के जन्म के साथ मनाता है।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना नहीं है, बल्कि बच्चों में प्रकृति प्रेम, सेवा भाव, जिम्मेदारी, और स्थायित्व का संस्कार विकसित करना है। विद्यालय का मानना है कि जब कोई बच्चा स्वयं पौधे को लगाता है, उसे पानी देता है, उसकी वृद्धि को देखता है, तो वह जीवन और प्रकृति की मौलिक एकता को अनुभव करता है।

समाज के लिए प्रेरणा

यह हरियाली क्रांति अभियान अब एक आंदोलन का रूप ले रहा है। अन्य विद्यालय भी इस मॉडल को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। कुछ शिक्षण संस्थानों ने "एक विद्यार्थी – एक पौधा" की अवधारणा को अपने यहां भी लागू करने का प्रस्ताव रखा है।

यदि हर विद्यालय इस प्रकार का अभियान प्रारंभ करे तो न केवल लाखों पौधे रोपे जा सकते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाया जा सकता है।

शिक्षा और संस्कार का संगम

जैनाचार्य अजरामर श्री सरस्वती विद्यालय हमेशा से ही संस्कार आधारित शिक्षा का पक्षधर रहा है। इस अभियान के माध्यम से शिक्षा को व्यवहारिक बनाया गया है। विद्यार्थी केवल किताबी ज्ञान नहीं सीख रहे, बल्कि जीवन जीने की कला, प्रकृति से सामंजस्य और सामाजिक जिम्मेदारियों को आत्मसात कर रहे हैं।

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