किस प्रकार की मिट्टी किस प्रकार के धान के लिए अनुकूल होगी
किस प्रकार की मिट्टी किस प्रकार के धान के लिए अनुकूल होगी।
What type of soil would be suitable for what type of crop.
1.जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil) में होने वाली फसलें
यह मीठी हल्के पीले कलर की होती है और थोड़ी चिकनी होती है
मिट्टी को नदियों के किनारे, बाढ़ के मैदान और डेल्टास में पाएंगे। जलोढ़ मिट्टी पोटाश में समृद्ध होता है लेकिन इसमें फास्फोरस की कमी होती है।
जलोढ़ मिट्टी पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और गुजरात के उत्तरी भागों में पाई जाती है।
तंबाकू, कपास, चावल, गेहूं, बाजरा, ज्वार, मटर, लोबिया, काबुली चना, काला चना, हरा चना, सोयाबीन, मूंगफली, सरसों, तिल, जूट, मक्का, तिलहन फसलें, सब्ज़ियों और फलों की खेती इस मिट्टी में होती है।
2.काली मिट्टी (Black Soil)
इस मिट्टी में होने वाली मुख्य फसल कपास है लेकिन इसके अलावा गन्ना, गेहूं, ज्वार, सूरजमुखी, अनाज की फसलें, चावल, खट्टे फल, सब्ज़ियां, तंबाखू, मूंगफली, अलसी, बाजरा व तिलहनी फसलें होती हैं।
काली मिट्टी चूना, लोहा, मैग्नीशियम और एल्युमिनियम से समृद्ध होता है। काली मिट्टी गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में दक्खन लावा पठार और मालवा पठार पर पाई जाती है।
3.लाल और पीली मिट्टी ( Red Soil)
इस मिट्टी में आयरन ज्यादा है।
चावल, गेहूं, गन्ना, मक्का, मूंगफली, रागी, आलू, तिलहनी व दलहनी फसलें, बाजरा, आम, संतरा जैसे खट्टे फल व कुछ सब्ज़ियों की खेती अच्छी सिंचाई व्यवस्था करके उगाई जा सकती हैं।
मिट्टी तमिलनाडु, कर्नाटक के कुछ हिस्सों, दक्षिण-पूर्वी महाराष्ट्र, पूर्वी आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, छोटा नागपुर (झारखंड), दक्षिण बिहार, पश्चिम बंगाल (बीरभूम और बांकुरा), उत्तर प्रदेश (मिर्जापुर, झाँसी, बांदा, और हमीरपुर), पूर्वी राजस्थान, असम, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, और मेघालय में पाई जाती है।
4.लैटेराइट मिट्टी (Laterite soil)
लैटेराइट मिट्टी पहाड़ियों और ऊंची चट्टानों की चोटी पर बनती है। मानसूनी जलवायु के शुष्क और नम होने का जो परिवर्तन होता है उससे इस मिट्टी को बनने में मदद मिलती है।
लैटेराइट मिट्टी ज़्यादा उपजाऊ नहीं होती है लेकिन कपास, चावल, गेहूं, दलहन, चाय, कॉफी, रबड़, नारियल और काजू की खेती इस मिट्टी में होती है। इस मिट्टी में आयरन की अधिकता होती है इसलिए ईंट बनाने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।
महाराष्ट्र के दक्षिणी हिस्सों, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, झारखंड, केरल, असम और मेघालय के कुछ हिस्सों में पाई जाती है।
5.शुष्क मिट्टी
आरावली के पश्चिमी क्षेत्र में पाई जाने वाली शुष्क मिट्टी में रेत की मात्रा अधिक होती है और क्ले की मात्रा कम होती है। सूखे वाले क्षेत्रों में ह्यूमस और मॉइश्चर की कमी कारण भी ये मिट्टी शुष्क हो जाती है। ये मिट्टी क्षारीय होती है और इसमें नमक की मात्रा अधिक व नाइट्रोजन की मात्रा कम होती है। इस मिट्टी का रंग कुल लाल या भूरा होता है।
इस मिट्टी में गेहूं, मक्का, दलहन, मक्का, जौ, बाजरा आदि उगाय जा सकता हे।
महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, गुजरात, आंध प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में होती है। गोदावरी, कृष्णा, नर्मदा और ताप्ती नदियों के किनारों पर यह मिट्टी पाई जाती है।
उमेश सोन्डागर
(योग शिक्षक, गिलोय प्रचारक)
प्रमुख,
विद्या भारती - पर्यावरण विभाग
पूर्व कच्छ
आदिपुर. कच्छ -गुजरात ( INDIA)
M- +919726792900
sondagarumesh@gmail.com
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